अतुलनीय भारत और इसके विकास के आयाम

– आज जो आपकी पहचान बन रही है उसमें आप एक छांदस रचनाकार के रूप में उभर रहे हैं। गीत, मुक्तक, ग़ज़ल आप लिख रहे हैं। क्या आपने छंद मुक्त कविताएँ भी लिखी हैं। अगर नहीं तो क्यों? क्या आप इस शैली को कम प्रभावी मानते हैं? या छंद मुक्त लिखने में आप अपने को असहज महसूस करते हैं?
– मेरी अभी तक पांच पुस्तकें प्रकाषित हुई है।

❐ ‘अदबी आईनो’ (सिंधी में) गद्य साहित्य की विविध विद्याओं पर

❐ ‘प्रेरक’, अर्थपूर्ण कथन और सूक्तियां (हिंदी मंे)

❐ ‘सिंधी सुविचार’ ( देवनागरी सिंधी में)
❐ सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियां (हिंदी मंे)

❐ मनोहर सूक्तियां (नई पुस्तक हिंदी मंे) मैंने कुल मिलाकर 2500 के लगभग सूक्तियां लिखी हंै। – क्या आप भी यह मानते हैं कि गीत विदा हो रहे हैं और ग़ज़ल तेज़ी से आगे आ रही है? क्या इसका कारण ग़ज़ल का अधिक संप्रेषणीय होना है? या पिफर कोई और कारण आप समझते हैं?
– मैं ओर अधिक सूक्तियां लिखना चाहता हँू व्यंग्य मेरा प्रिय विषय है, उस पर भी कलम आजमाऊंगा, व्यंग्य के बाद नम्बर कहानी का है, मैं जो भी लिखना चाहता हूँ लीक से हटकर लिखना चाहता हूँ। सूक्तियाँ मैंने अधिक लिखी है इसका कारण यह है कि मुझे इसे लिखने में बहुत कम समय लगता है अधिकतर सूक्ति भीतर की आवाज और जीवन अनुभव होने के कारण दिल के करीब भी है।
मानव जीवन को समझने के लिए लेखन ने विभिन्न रूपों में अपना योगदान दिया है। जीवन को बेहद सरल तरीके से समझने के लिए सूक्तियों का अपना विशेष महत्व है। कम शब्दों में ब़डी बात कहने की सामथ्र्य सूक्तियों में होती है। सरल शब्दावली इस सामथ्र्य को दोगुना कर देती है। इन सूक्तियों से व्यक्ति यदि समझना चाहे तो बहुत कुछ समझ सकता है और अपने जीवन को सँवार सकता है। सूक्तियों का महत्व तब और ब़ढ जाता है जब कोई वक्ता मंच से ख़डे होकर भाषण देता है या कोई लेखक अपने लेख को सुन्दर बनाने के लिए सूक्तियों का प्रयोग करता है। जनमानस में तमाम सूक्तियाँ आम दिनचर्या में प्रयोग होती हैं और मस्तिष्क में हमेशा विद्यमान रहती हैं। तमाम सूक्तियाँ युग-युगान्तर से हमें दिशा बोध दे रही हैं। संस्कृत साहित्य की तमाम सूक्तियाँ अमर हैं। सूक्तियाँ पग-पग पर हमारा पथ प्रशस्त करती हैं। हारे हुए मनुष्य को जीत की प्रेरणा देती हैं और एक मनुष्य को एक सफल मनुष्य बनाने के जीवन का निचोड़ हैं सूक्तियाँ डाॅ. शैलेष गुप्त ‘वीर’ हीरो वाध्वानी
लिए भरसक प्रयत्न करती हैं। सच तो यह है कि सूक्तियाँ जीवन का निचो़ड होती हैं।
सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ के माध्यम से श्री हीरो वाधवानी ने जीवन का जो निचो़ड प्रस्तुत किया है, निश्चित रूप से सार्थक तथा अति महत्वपूर्ण है। जीवन के तमाम अनुभवों और अध्ययन के साथ नये सन्दर्भों में नयी बातें भी समाहित हैं इन सूक्तियों में। अजमेर में जन्में और वर्तमान में फिलीपीन्स की राजधानी मनीला को अपना कार्यक्षेत्र बना चुके वाधवानी जी की सूक्तियाँ उद्धरण बनें, मेरी अनन्त शुभकामनाएँ। उनकी निरन्तर सक्रियता और ऊर्जा भविष्य में और भी पुस्तकों का आकार ग्रहण करेगी, मुझे विश्वास है।
पुस्तक से हीरो वाधवानी जी की 10 सूक्तियाँ ‘स्वयं की आँखें दूसरों की आँखों से अधिक देखती हैं और स्वयं के पैर दूसरों के पैरों से अधिक कार्य करते हैं।’
‘छोटी सी चींटी का ब़डा नाम इसलिए है, क्योंकि वह रात और दिन काम करती है और एकता को अति आवश्यक समझती है।’
‘बिना मेकअप के नन्हे बच्चे मेकअप करने वाली सुंदरियों से अधिक सुंदर होते हैं।’
‘जानकारी धन और समय बचाती है।’ ‘ज़डों से जुदा होने वाला पे़ड, पे़ड नहीं रहता, काठ हो जाता है।’
‘जो परिश्रम, प्यार और सेवा करता है, वह आस्तिक है बाकी सब नास्तिक हैं।’
‘एक पी़िडत की मदद करना पचास मन्दिरों में जाने और सौ पूजा पाठ करने से बेहतर है।’
‘इंसान को भूख और प्यास इसलिए लगती है ताकि वह परिश्रम करे।’
‘गलती को स्वीकार करना और सुधारना नब्बे प्रतिशत सुधार है, शेष दस प्रतिशत गलती क्यों और कैसे हुई, इसके संबंध में विचार करना है।’
‘निन्दा करने वाले को सुझाव देने का अधिकार निन्दा करने का अधिकार नहीं है।’
हीरो वाधवानी जी की पुस्तक ‘सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ’ प्रेरक व अर्थपूर्ण हैं। पुस्तक की लगभग सारी सूक्तियाँ भावप्रणव व गहरे अर्थ लिए हैं। जब पहली बार इस पुस्तक को देखा तो मुझे कुछ अटपटा लगा। सच कहूँ तो मैंने पहले सूक्तियाँ प़ढी हैं लेकिन इस तरह पुस्तकाकार रूप में चाणक्य अथवा विदुर अथवा गाँधी के विचार या सूक्तियाँ प़ढी हैं पर ऐसा कम ही होता है गागर में सागर जैसी सूक्तियाँ मनोज तिवारी हीरो वाध्वानी
कि कोई लेखक अपनी सूक्तियाँ पुस्तक रूप में छपवाए। पुस्तक प़ढने के बाद लगा कि जिस पुस्तक को देखकर नाक -भौं सिको़ड रहा था वह तो अनमोल खजाना है। वाधवानी जी ने अपने सकारात्मक विचार की ल़िडयाँ जो पिरोई हैं वे गागर में सागर भरने जैसी हैं। सही मायनों में पुस्तक की सूक्तियाँ जीवन-पथ पर सरलता से आगे ब़ढने और कर्मरत रहने की प्रेरणा देती हैं। हीरो वाधवानी जी को उनके श्रेष्ठ, ऊर्जस्वित व सकारात्मक विचारों को अपनी सुक्तियों में पिरोने के लिए बहुत-बहुत बधाई संप्रेषित करता हूँ।
कुछ सूक्तियाँ उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत कर रहा हूँ गौर कीजिएगा- ‘आलस्य सफलता और समय का दुश्मन है।’, ‘हरे-भरे उद्यान आधे स्वर्ग के समान है।’, ‘चींटियाँ स्वस्थ और जवान रहती हैं क्योंकि वे काम को बोझ नहीं समझती और चिंता नहीं करतीं।’

सूक्तियाँ पढ़कर अशांत मन शांत हो जाता है हीरो वाध्वानी
‘कोई जंग.. कोई सर्कस.. कोई कहानी कह गया… कम ही मिले ‘ए जिन्दगी’… तुझको जिन्दगी कहने वाले…!! सच ही है न! जिन्दगी को जिन्दगी कहने वालों की सोच अलग, नजरिया अलग, तरीका अलग जिंदगी जीने का। सो हर किसी की बात से इत्तेफाक रखना हमारे बस में भी नहीं अलबत्ता उस बात से अगर हम कुछ समझ सकें,कुछ ग्रहण कर सकें और अपनी जिंदगी में कुछ बदलाव ला सकें तो कुछ बात बने। ऐसे ही कुछ कथन कुछ सूक्तियाँ होती हैं जीवन और मानवीय व्यवहारों पर आधारित जो दिल को छू लेती हैं। कई बार तो उन सूक्तियों को प़ढकर अशांत हुआ मन शांत हो जाता है तो कभी उन सूक्तियों की गू़ढता अथवा गहराई हमें इस कदर जीवन दर्शन करा जाती हैं कि जीवन के अर्थ ही बदल जाते हैं बशर्ते उन सूक्तियों उन कथनों पर हम अमल कर पाएँ।

ऐसी ही मन को ठंडक सा एहसास करवातीं, जिन्दगी के पहलुओं से रूबरू करवातीं एक पुस्तक ‘सकारत्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ’ मिली जिसके लेखक हैं आदरणीय हीरो वाधवानी जी। पहले पहल ब़डे बुजर्गों की बातों को बहुत मान और तवोज्ज्ञजो दिया जाता था और हम अमल में लाया करते थे। आज के आधुनिक युग में इन सूक्तियाँं एक सरलीकरण रूप में दृष्टिगोचर हो रही हैं मीडिया के विभिन्न रूपों में। हीरो वाधवानी जी ने इन सूक्तियों को एक पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया है ताकि समय समय पर हम इन्हें प़ढकर चिंतन-मनन कर अपने जीवन में उतार सकें। ऐसी ही कुछ सूक्तियाँ बेहद सुंदर और अर्थपूर्ण लगीं। मसलन…

‘सब कुछ चले जाने के बाद भी इंसान शून्य नहीं होता,उसके पास हजारों का साहस,लाखों का शरीर और करो़डो के स्वांस होते हैं।’ रश्मि तारिका

‘गलती स्वीकार करना और सुधारना 90 प्रतिशत सुधार है,शेष दस प्रतिशत गलती क्यों और कैसे हुई इसके सम्बंध में विचार करना है।’ ‘कही गई बात को सात समंदर लाँघने में मात्र एक सेकंड लगता है।’

‘माँ अद्भुत कार्य करती है,अपनी 90 खुशियाँ बच्चों को दे देती है और उनके 90 गम अपने पास रख लेती हुई,ऐसा कोई कार्य कोई दानी,धर्मात्मा और संत महात्मा भी नहीं करता।’ ‘नौ ग्रहों से ब़ढकर दसवाँ ग्रह है,वह है आपकी हिम्मत जो सभी ग्रहों की दशा और दिशा बदल देती है।’

‘एक मुस्कुराहट में बीस श्रृंगार सम्मिलित होते हैं।’ ‘आत्मविश्वास सृजन करता है,अंधों को आंखें देता है, बहरों को कान देता है और लँग़डे को टाँग देता है।’

‘दसवीं बार किया गया प्रयत्न पहली बार किये गए प्रयत्न से दस गुना अधिक सराहनीय है।’

‘इंसान के बारे में चेहरा चैथी बात बताता है, जबान आधी बात बताती है और दया,उदारता,प्रेम सब कुछ शत प्रतिशत् बता देती है।’

जीवन में कही बातों का,कथनों का,सूक्तियों लकोक्तियों का कोई अंत नहीं। इनका महत्व तभी है जब हम इन सकारात्मक सूक्तियों के अर्थ समझ कर इनको अपने जीवन में अपना सकें तभी ये सार्थक हैं।

आदरणीय हीरो वाधवानी जी (राजस्थान) जो एक प्रतिष्ठित कवि, लेखक एवं विचारक हैं, उनकी एक बहुत ही उपयोगी पुस्तक प्राप्त हुई जिसका नाम है ‘प्रेरक, अर्थपूर्ण कथन एवं सूक्तियाँ’ है । इस पुस्तक का जैसा नाम है, यह उसे पूरी तरह सार्थक करती है । यथा नाम तथा गुण को पूर्ण रूप से व्यंजित करती यह पुस्तक अपने आप में एक उपयोगी पुस्तक है जो सांसारिक जीवन निर्वहन करने वाले सभी लोगों के लिए सूर्य के समान है। जीवन में किन परिस्थितियों में कैसे व्यवहार करना है और पग-पग पर किन किन स्थितियों एवं परिस्थितियों में क्या निर्णय लेना है, यह पुस्तक एक कुँजी के समान कार्य करती है।

कम शब्दों में गागर में सागर भरने की अद्भुत कला इन सूक्तियों के माध्यम से आदरणीय हीरो वाधवानी जी ने कृत किया है। यह सभी सूक्तियाँ जीवन को जीने के छोटे छोटे परंतु अत्यंत गू़ढ सूत्र या वितउनसंमे हैं। मेरा विचार है कि यह पुस्तक आज के समय में सही जीवन व्यापन करने की चाह रखने वाले सभी परिवार एवं व्यक्ति के पास होनी चाहिए।

मैं इस पुस्तक के लिए आदरणीय हीरो वाधवानी जी को अपनी मंगल शुभकामनायें प्रेषित करता हूँ।

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