किसान संघर्ष समिति की रैली

किसान संघर्ष समिति की रैली

5-8-98 को किसान संघर्ष समिति की रैली हुई। यह रैली बिजली पानी की कमी के विरोध में हुई। सभा को संबोधन करते हुये हरदवारी लाल ने कहा कि हरियाणा के किसानों को तीनो लालों ने कुछ नहीं दिया किसानों को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिये। बडे़-बड़े फार्माें वाले इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। गावों की यह हालत है कि बिजली न होने के कारण पीने का पानी भी उपल्बध नहीं है।

काÛ लेखराज ने कहा कि आज हम आखिरी घोषणा करेंगे करो या मरो। एक नौजवान साथी ने कहा बेरोजगारी, मंडी की लूट, पानी बिजली की किल्लत के समाधान के लिये हमें सभी वर्गों कर्मचारी, नौजवान, किसान, मजदूर आदि को साथ लेकर लड़ना है।

काÛ सुखदेव ने कहा कि मजदूर किसान सब एक हैं। हमें अपने असली दुश्मन की पहचान करनी है। हर तरफ रिश्वत खोरी का बोलबाला है। साथी गुरतेज सिंह मान ने कहा कि आज खेती घाटे का सौदा है। किसान कर्ज के नीचे दब रहे हैं। हर चीज में मिलावट है। आयें हम सब जाति-पाति को छोड़कर इकट्ठे हांे और वोट की राजनीति का वाईकाट करें और अपने जन संगठनों को मजबूत करें।

एक वक्ता ने कहा कि देश को किसान, शहीदों ने आबाद किया है परन्तु इन झूठे नेताओं ने देश को बर्बाद किया है। साथी ने कहा जब संसद भवन में किसानों के बारे में बात उठी तो उस समय 46 सांसदों को छोड़ कर बाकी सारे बाहर चले गये। इससे स्पष्ट हो जाता है कि किसानों के ये सांसद कितने हिमायती हैं वह किसानों की बात तक सुनना फिजूल समझते हैं।

अन्त में सभी किसान स्थानीय मन्दी गनेशी लाल का पुतला लेकर बाजारों से होते हुये किसानों ने अपने हाथों में सुखी हुई फसले लिये जूलूस निकाला। पुराना बस अड्डा चैक पर किसानों ने जाम लगाकर गनेशी के पुतले को जलाया बाद में भारी संख्या में किसान डीÛसीÛ के निवास पर पहंुचे वहां बड़े गरमखरोशी के साथ नारे लगाये गये। डीÛसीÛ को बाहर आकर किसानों की मांगे सुननी पड़ी परन्तु वह कोई आश्वासन नहीं दे सका। धरना 28-7-98 से जारी है रोजाना पांच किसान भूखहड़ताल पर बैठते हैं।

सिरसा बंद

31-7-98 को किसान संघर्ष समितिके अह्वान पर सिरसा बंद किया गया, उस बन्द को सफल बनाने के लिये किसानों ने जी जान से मेहनत की। किसानों को सभी वर्गों से भारी समर्थन मिला अन्त में इस बंद में सत्ता पक्ष को छोड़ कर सभी पर्टियां शामिल हो गई। बंद के दौरान भगत सिंह चैक पर रैली का आयोजन किया गया भारी संख्या में किसान जीपों ट्रालियांे में शहर पहुंचे बाजार बिल्कुल बंद रहे। यहां तक कि कोई चाय की दुकान भी शहर में खुली नहीं देखी गई। शान्त मई वातावरण पूर्ण रूप से बंद सफल रहा। किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

रेल के तकनीकी कर्मचारी संघर्ष की राह पर

लगातार 50 वर्षों से अंग्रेजी गुलामीं की जिन्दगी जी रहा रेल का तकनीकी कर्मचारी अब घुटन महसूस कर रहा है। टैक्नीकल रेलवे एम्पलाइज एसोसिएशन ने संघर्ष का एलान कर दिया है। जो वेतन आयोग द्वारा घोर अन्याय किया गया, इस पर बोलते हुये संगठन के महासचिव डीÛसीÛ सैनी ने बताया कि पांचवे वेतन आयोग ने डी ग्रुप समाप्त कर हाईस्कूल पास कर्मचारी को 3050-4590 का वेतनमान देने की सिफारिश की थी जो आज तक लागू नहीं हुआ।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेÛपीÛ मिश्रा ने रेल प्रशासन पर वेतनमान में भारी भेदभाव करने का आरोप लगाकर कहा कि केवल हाईस्कूल पास क्लर्क जिनका वेतन 3050-4590 से शुरू होकर अन्त में 1600-7000 रुपये घोषित कर रखी है जबकि रेल तकनीकी कर्मचारी की योग्यता, हाईस्कूल तथा आई टी आई व 6 माह की ट्रेनिंग शिक्षा होती है और वह सारा दिन धूल, गर्मी, तेल में काम करता है फिर भी उसका वेतनमान क्लर्क के वेतनमान से कम होता है। उन्होंने आगे के कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए बताया अगर फिर भी मांगो पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो सीÛईÛसीÛ मीटिंग में सांकेतिक हड़ताल का निर्णय लिया जा सकता है।

इस गेट मिटिंग में ज्ञान सिंह रमेश चंद, पीÛ केÛ सक्सैना, मुगलसराय से श्री निवास सिंह, मुरादाबाद से देवी दास ने भाग लिया।

कर्मचारी आंदोलन के दृष्टिगत हरियाणा में ’एस्मा’ लागू

हरियाणा सरकार ने राज्य के कर्मचारियों की जायज मांगो को लेकर हो रहे आंदोलनों को कुचलने के लिये अपने तानाशाही कानून ’एस्मा’ (आवश्यक सेवा अधिनियम) का प्रयोग करने का निर्णय किया है और सरकारी सेवाओं को आवश्यक घोषित करते हुए कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षकों को संदेश भेज कर कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों के आंदोलन से सख्ती से निपटा जाये मंत्रियों के आवासों पर प्रदर्शन करने और गिरफ्तारियां देने के कार्यक्रम को मद्देनजर रखकर यह फैसला लिया है।

उधर हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ सरकार की धमकियों की परवाह न करते हुए अपने घोषित कार्यक्रमांे पर अटल है। सर्व कर्मचारी संघ द्वारा प्रदर्शन के घोषित कार्यक्रम के अनुसार संघ 12 अगस्त को फतेहाबाद, 21 अगस्त को जींद, 27 अगस्त को झज्जर, 2 सितम्बर को कैथल 4 सितम्बर को यमुनानगर, 14 सितम्बर को कुरूक्षेत्र, 15 सितम्बर को अम्बाला व पंचकूला, 17 सितम्बर को करनाल, 22 सितम्बर को पानीपत, 23 सितम्बर को फरीदाबाद, 24 सितम्बर को गुड़गावां, 7 अक्तूबर को हिसार और 8 अक्तूबर को भिवानी में मांत्रियों के घरों पर प्रदर्शन होगा। 11 अगस्त को संकल्प दिवस मनाया जायेगा।

हरियाणा बिजली बोर्ड कर्मियों की हड़ताल

हरियाणा राज्य के बिजली बोर्ड कर्मचारी जिस बहादुरी के साथ अपनी मांगो को लेकर हरियणा सरकार से टक्कर ले रही है, बिजली कर्मचारी लगभग एक साल से सरकार के मजदूर विराधी नीति के खिलाफ अपनी विरोध की मुहिम को तेज किये हुए है। जिसके परिणामस्वरूप उनका आंदोलन अग्रसर कदम की ओर बढ़ रही है। आगे के कार्यक्रम के तहत अपनी मांगो के स्वीकार करने में सरकार के अड़ियल रूख के विरोध में 16 सितम्बर को एक दिवसीय राज्य स्तरीय हड़ताल पर जाने का कानूनी नोटिस दिया है। यूनियन ने विरोध धरनों के कार्यक्रम भी घोषित किये है। 6 अगस्त से 2 सितंबर तक चलाने वाले इन सामूहिक धरनों में सभी कर्मचारी शामिल होंगे।

यूनियन ने सभी कर्मचारियों से कहा है कि वे अपने ज़िला में घोषित विरोध धरनों में शामिल होने के लिये सामूहिक अवकाश के लिये आवेदन करें और अपने आवेदन में स्पष्ट तौर से दर्ज करें कि वे विरोध धरने में शामिल होने के लिए अवकाश ले रहे हैं।

यूनियन ने कर्मचारियों को भेजे परिपत्र में कहा है कि विरोध करने वाले दिन कोई भी कर्मचारी ड्यूटी नहीं देगा और सरकारी काम का बहिष्कार करेगा।

 

 

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