डाक कर्मियों के संघर्ष का बिगुल

डाक कर्मियों के संघर्ष का बिगुल

पूरे भारत में डाक कर्मियों ने अपने दस सूत्री कार्यक्रम की मांगो को लेकर 8 जुलाई से अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी।

उन्होंने यह कदम वेतन वृद्धि, कैजुअल मजदूरों का विभागीयकरण करने, बोनस सहित अन्य लाभ देने, तथा पिछले दो वर्षो का अतिरिक्त दिनों का बोनस भुगतान करने आदि मांगो को लेकर उठाया है।

हमारे देश का डाक विभाग कहने को तो देश का सबसे बड़ा विभाग है लेकिन इसकी कार्य प्रणाली क्या है वह भी 80 प्रतिशत लोगों को मालूम नहीं हैं। यह विभाग, जिसमें साढ़े तीन लाख कर्मचारियों को बन्धुआ मजदूर बनाये हैैं उनका नाम है अतिरिक्त विभागीय ऐजेन्ट (इÛडीÛएÛ)। इन लोगों को आज के आसमान छूती महंगाई के युग में भी सिर्फ 420 रुपये में अपना गुजारा करना पड़ रहा है।

एक इÛडीÛएÛ तो अपनी साईकिल से लगभग 40 किलोमीटर तक की दूरी सुबह से शाम तक काम करते हुये तय करता है और यही दिनचर्या एक महीने करने के उपरांत करते रहने पर उसे महज 420 रुपये पकड़ा दिये जाते है।

भारत में किसी भी सरकारी विभाग में छुट्टी निश्चित होती है लेकिन इÛडीÛएÛ कर्मियों को कोई छुट्टी नहीं दी जाती अगर किसी कारणवश ये छुट्टी लें तो उस दिन की मजदूरी काट दी जाती है।

सेवा निवृत्ति के मामले में इस विभाग का जवाब नहीं है। यदि कोई भी इÛडीÛएÛ कर्मी कोई कार्य करने लायक नहीं रहता हो तो उसका नाम रजिस्टर से काट दिया जाता है और उसको सेवा मुक्त समझा जाता है। और उसको, जो उसने विभाग को इतने साल अपनी सेवाऐं प्रदान की है, बदले में कुछ भी नहीं दिया जाता।

डाक कर्मियों का कहना है कि अगर विभाग द्वारा हमारा शोषण चलता रहा तो हम कड़ा विरोध कर संघर्ष करेंगे जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी विभाग व सरकार की होगी।

अब नर्सें एक जुलाई को दिल्ली में रैली करेंगी

नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन ने चंडीगढ़ के 26 जून की सफल रैली से प्रेरित होकर, हरियाणा सरकार को चेतावनी दी हैं कि यदि 30 जून तक उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे एक जुलाई को दिल्ली में रैली करके केंद्रीय सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद करेंगी।

उन्होंने बताया कि दिल्ली की ओर कूच करने का यह निर्णय रैली के बाद चंडीगढ़ में नर्सिंग स्टाफ एसोसियशन की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया।

कुरुक्षेत्र जिला नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन की अध्यक्ष ने बताया कि वहां यह भी निर्णय किया गया है कि नर्सों पर गत दिवस पिपली (कुरुक्षेत्र) में पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज के विरुद्ध सारे हरियाणा की नर्सें 28 जून के बाद कुरुक्षेत्र की ओर कूच निर्णय किया है कि यदि 28 जून जक दोषी पुलिस वालों को दंडित न किया गया तो कुरुक्षेत्र में नर्सों का कूच होगा।

नर्सों का अनिश्चितकालीन आंदोलन विगत एक माह से चल रहा हैै। नर्सें प्रतिदिन बडं़ी सफलता और बहादूरी के साथ स्थान-स्थान पर प्रदर्शन कर सरकार से मोर्चा ले रहीं हैं। उनकी इसी सफलता से खार खाये हरियाणा सरकार उनको सरकारी गुण्डो जरिये प्रड़ारित करने और अनैतिक रूप से उनके आंदोलन को दबाने के चक्कर में पड़ी हुई है। परन्तु नर्सें भी बहादूरी के साथ संघर्ष कर रहीं है।

खेत मजदूरों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया

हरियाणा खेत मजदूर यूनियन ज़िला सिरसा की इकाई ने उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना दिया। बाद में अपनी मांगों संबंधी ज्ञापन दिया। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि जमींदार खेत मजदूरों का शोषण कर रहें है। कई बार इस सम्बंध में आयुक्त से शिकायत की गई थी परंतु प्रशासन ने अनसुनी कर दी। उन्होंने मजदूरों के अधिकारों, समान काम, समान वेतन, पेंशन, चिकित्सा सुविधा आदि दिए जाने का केंद्र सरकार से आग्रह किया। खेत मजदूर अब अपने हको के प्रति जागरूक हों रहे हैं।

शिक्षक आंदोलन

राजकीय अध्यापक संघ हरियाणा ने अध्यापकों की मांगों के प्रति हरियाणा सरकार की बेरुखी के विरुद्ध आंदोलन तेज करने की योजना बनाने के लिये जुलाई में कुरुक्षेत्र में संघ की राज्य कार्यकारणी की बैठक बुलाई है।

अध्यापक संघ ने कहा है कि सरकार साठ हजार अध्यापकों के वेतनमानों की विसंगतियों पर तो विचार करने के लिये तैयार नहीं है।

तथा वित्त विभाग केवल उन्हीं विसंगतियों पर विचार करने को तैयार है जिन्हें दूर करने की सिफारिश विभागों के प्रशासनिक मुखिया द्वारा की गई हैं।

उन्होंने कहा है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को प्राथमिक शिक्षक, पीÛटीÛआईÛ, कला, संगीत, सिलाई शिक्षक, मास्टर वर्ग, प्राध्यापक एवं प्राचार्य वर्गो में कोई विसंगति दिखाई नहीं देती।

दुनिया में आठवां सबसे बड़ा कर्जदार देश!

देश के विदेशी कर्जों पर नज़र डालें। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, विदेशी कर्जा मार्च 1998 के विनिमय दरों से 150, 765 करोड़ रुपये था। हिन्दोस्तान दुनिया के कर्जदार देशों में 8वां नम्बर पर है। देश का विदेशी कर्जा पिछले साल के पूरे निर्यातों की कीमत से लगभग 25,000 करोड़ रुपये ज्यादा है।

इसके अलावा, विदेशी कर्जा का 40 प्रतिशत अमरीकी डालरों मंें है। हाल में जब डालर की तुलना में रुपये की कीमत इतनी घट गई है, तो रातों-रात यह विदेशी कर्जा कई अरब डालरों से बढ़ गया होगा।

इस पूरे कर्जे में कम समय के लिये लिया गया कर्जा लगभग 6.3 प्रतिशत है। यह मूल्य काफी महत्व रखता है क्योंकि कम समय के लिये लिया गया कर्जा एक-दो महीने के अन्दर चुकाना पड़ता है।

अगर देश की विदेशी मुद्रा राशि कम हो जाये, तो वह दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों की तरह कर्ज के जाल में फंस सकता है। इससे देश की उत्पादक ताकतों को बहुत नुकसान होगा और साम्राज्यवादी घुसपैठ का रास्ता और सुगम हो जायेगा।

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