थर्मल पावर कर्मियों में भारी रोष

थर्मल पावर कर्मियों में भारी रोष

बदरपुर थर्मल पावर के कर्मचारियों ने वर्षो से स्थगित यूनियन चुनाव की मांग को लेकर तथा प्रबंधक के शोषण के खिलाफ तथा पेंशन के लिये अवैधानिक कटौती के विरोध को लेकर एक विशाल सभा का आयोजन 22 जुलाई को किया।

सभा के प्रारम्भ में मजदूरों के “दम कितना है दमन में, तेरे देख लिया है देखेंगें” के नारांे के साथ पूरी सभा गूंज उठी।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबन्धक कमेटी तीसरी पेंशन के नाम पर मूल वेतन में काफी कटौती करती है, जो कि प्रबन्धकों के द्वारा कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी है। प्रबन्धक कमेटी ने पेंशन योजना के अन्तर्गत हो रही उनके वेतन में कटौती के बारे में पूर्व कोई सूचना कर्मचारियों को नहीं दी। वे आपस में ही सहमति प्रदान कर नियम बनाते है जिससे प्रबन्ध कमेटी के सदस्यों की तानाशाही साफ झलकती है।

आवास समस्या को लेकर कर्मचारियों के नेताओं ने बयान दिया कि प्रबन्धक कमेटी कोन्टरेक्ट अफसरों को अच्छी आवास व्यवस्था दे रखी है लेकिन यहां के मूल कर्मचारी जो 25 सालों से अपना श्रम दान कर रहें है उनको कच्ची कालोनीयों में सीमेन्ट के चद्दर से बनी छत के नीचे गुजारा करना पड़ता हेै। दूसरी ओर, वहां काम कर रहें ठेके मजदूरों की हालत बहुत बदतर है। ठेके मजदूरों के वेतन में अवैधानिक कटौती करके उनका प्रबंधक एवं ठेकेदार मिलकर शोषण करते हैं।

सभी वक्ताओं ने थर्मल पावर प्रशासन व सरकारी नीति की जमकर आलोचना की तथा कहा कि यदि आइन्दा प्रबन्धक कमेटी अपनी रवैया नहीं बदला तो थर्मल पावर के मजदूर कड़े संघर्ष की राह पर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधको की होगी।

रेल कर्मचारियों का बढ़ता आक्रोश

हिन्दोस्तान के 30 लाख रेल कर्मियों के बीच, अपने बिगड़ते काम के हालातों के खिलाफ़ आक्रोश किसी भी क्षण एक भयानक तूफान की तरह संघर्ष में टूट पड़ने वाला है।

तुग़लकाबाद लोको वर्कशाप में काम कर रहा एक तकनीकी रेल कर्मचारी दुख व गुस्से से कहता हैः दो साल तक कम्युनिस्टों के सत्ता में होने का क्या फायदा हुआ? उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के लिये क्या किया?

रेलवे में 15 लाख तकनीकी मजदूर हैं। वे इंजन व डिब्बे बनाने व उनकी मरम्मत करने में दिन-रात काम करते हैं। वे हिन्दोस्तान की विशाल रेल व्यवस्था की लाइनों, सिग्नलों व बाकी जटिल मशीनरी की देखभाल करते हैं। देश के सबसे बड़े उद्योग व नौकरी दिलाने वाले, हिन्दोस्तान रेलवे की रीढ़ लोको रनिंग स्टाफ है। उनके काम से ही इंसान व माल
एक जगह से दूसरी जगह आता जाता है। उनके बिना अर्थव्यवस्था ठप्प हो जाती। पर उनकी हालतें क्या है?

रेलवे तकनीकी कर्मचारी संघ के कार्यकर्ता, काÛ धर्मवीर शर्मा का कहना हैः 7 लाख तकनीकी कर्मचारी, जिनमें में बहुत से आईÛटीÛआईÛ स्नातक हैं, सभी तकनीकी काम करते हैं, जो कि अक्सर बहुत खतरनाक काम होता है। परन्तु उन्हें ग्रुप डी वर्ग में डाला गया है, यानि उन्हें स्वीपरों व दूसरे अप्रशिक्षित कर्मचारियों के बराबर वेतन व दूसरी सुविधायें मिलती हैं। यह बर्दाश्त नहीं हो सकता। रेलवे के बीकानेर खंड के रिवाड़ी कैरेज एंड वैगन शाॅप में तकनीकी कर्मचारियों को शौचालय साफ करना पड़ता है! तो फिर आईÛटीÛआईÛ की डिग्री का क्या फायदा हुआ, वे पूछते हैं?

रेलवे तकनीकी कर्मचारी संघ पूछते हैंः आज तकनीकी वे गै़र तकनीकी स्टाफ के वेतनों में इतना फ़र्क क्यों है, जब कि प्रथम वेतन आयोग में फिटर और सहायक स्टेशन मास्टर के बराबर वेतनमान होते थे? फिटरों और तकनीकी कर्मचारियों के वेतन स्थगित हो जाते हैं पर उनसे कम शैक्षणिक योग्यता वाले क्लर्क ज्यादा वेतन पाते हैं। कर्मचारियों को खतरा भत्ता क्यों नहीं मिलता, जब कि वे ग्रीज़, धूल, ऊंची वोल्टेज व अत्यन्त गर्मी वाले खतरनाक हालातों में काम करते हैं? तकनीकी कर्मियों को टेªन की माइलेज़ के अनुसार इनाम क्यों नहीं दिया जाता, सिर्फ गड़बड़ होने पर सज़ा दी जाती है?

मजदूरों ने यह भी बताया कि 30 लाख रेलवे कर्मचारियों, जिनमें 15 लाख तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं, के हाथ क्यों बंधे हुये हैं। रेलवे में दो यूनियन हैं,
एनÛएफÛआईÛआरÛ और एÛआईÛआरÛएफÛ। इन दोनों संगठनों के बीच कोई खास फर्क नहीं है, सिर्फ कुछ नेताओं के आपसी मतभेद के सिवाय। अलग अलग क्षेत्रों के 255 संगठन हैं। “जब हम इतने बंटे हुये हैं तो सरकार और अधिकारियों को हमसे क्या डर है? हमारे नेता रेलवे बोर्ड के सदस्यों के साथ वातानुकूलित दफ़्तरों में बैठकर समझौते करते रहते हैं और हमारी हालत भूल जाते हैं…जैसे कि संसदीय कम्युनिस्ट संसद या सरकार में हिस्सा लेते ही हमारे बारे में भूल जाते हैं” उन्होंने कहा।

तकनीकी कर्मचारी इस बात पर भी नाराज़ हैं कि रेलवे बोर्ड या मंत्रालय ने वेतन आयोग की सिफारिश, कि उन्हें 3050-4590 का ग्रेड दिया जाय, को लागू नहीं किया है।

अब देश भर के रेलवे वर्कशाप में रोज़ मीटिंग, प्रदर्शन व टूल डाउन हड़ताल हो रहे हैं और एक बड़े संघर्ष की तैयारी हो रही है। रेलवे कर्मचारियों ने ठान लिया है कि अब किसी नेता के स्वार्थ को अपनी एकता तथा इंसाफ के संघर्ष के रास्ते में रोड़ा नहीं बनने दिया जायेगा।

उत्तर प्रदेश के विद्युतकर्मी और शिक्षक हड़ताल पर

उत्तर प्रदेश के विद्युतकर्मी और शिक्षक हड़ताल के प्रति मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य विद्युत परिषद द्वारा घोषित वेतनमान अन्तिम है और इनमें अब किसी संशोधन की गंुजाइश नहीं है। विद्युत कर्मियों की हड़ताल से निपटने के लिये प्रशासन ने सेना की सहायता ली और यह धमकी दी गई कि शिक्षकों ने हड़ताल समाप्त नहीं की तो उनके स्थान पर नई नियुक्तियां कर दी जाएंगी।

भारत सरकार सरमायदारों के जेबों को भरने के लिए अपने खज़ाने को खोल देती है परन्तु जब देश के मजदूर, मेहनतकश अपनी रोजी, रोटी, और अधिकार मांगे तो उन्हें सरकार पुलिस, सैनिक द्वारा उनका मुंह बन्द कर दिया जाता है।

 

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