लोगों के भोजन और पोषण स्तर में गिरावट

लोगों के भोजन और पोषण स्तर में गिरावट

हिन्दोस्तान के हुक्मरान कहते हैं कि हरित क्रान्ति से देश की जनता के भोजन की समस्या दूर हो गई है। यह दावा किया जाता है कि पिछले 20 सालों में अनाजों के उत्पादन में वृद्धि होने से लोगों के स्वास्थ्य और पोषण की जरूरतें पूरी हो गई हैं। परन्तु हक़ीक़त कुछ और ही है।

हरित क्रान्ति से खेती में व्यापक तौर पर पूंजीवाद का विकास हुआ। 1960 के दशक में पंजाब और हरियाणा में जो प्रक्रिया शासकों द्वारा शुरु की गई थी, वह अब देश के कई इलाकों में फैल गया है। आम तौर पर खेती की उत्पादकता को बढ़ाने के साथ साथ, इस क्रान्ति का मुख्य उद्देश्य था उन फसलों के उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाना जिनसे अधिक मुनाफे हों।

इसके लिये, बहुत सारी खेती की भूमि पर चावल, गेहूं, व्यापारी फसल मसलन मूंगफली, तिलहन, गन्न्ाा, आदि उगाये गये। इन खेतों पर पहले मोटे अनाज, जो कि देहातों के गरीबों का मुख्य भोजन होता था, और दाल जो कि गरीबों के लिये प्रोटीन का स्त्रोत है, उगाये जाते थे।

हिन्दोस्तानियों के परहेज़ में दालों की मात्रा घटती जा रही है। अनाजों की तुलना में दालों की मात्रा का कम होना, यह आम मजदूरों, किसानों व मेहनतकशों के आहार की
घटती गुणवत्ता की निशानी है। प्रति व्यक्ति अनाज के उत्पादन में बढ़ोतरी का यह मतलब नहीं है कि गरीबों को और आसानी से ज्यादा भोजन मिल रहा है। राष्ट्रीय पोषण निरीक्षण बोर्ड के बार-बार किये गये सर्वेक्षणों के अनुसार, 1975-79 और 1988-90 की अवधि में कैलरी व प्रोटीन, दोनों की मात्रा घट गई है।

इन सभी तथ्यों से यह साबित होता है कि खेती में पूंजीवाद के विकास से हिन्दोस्तान के देहातों के किसानों व मेहनतकशों का उद्धार नहीं हो सकता है।

किसानों और प्रशासन में टकराव

राजस्थान के पातड़ा क्षेत्र के घग्गर दरिया में आई भयंकर बाढ़ के कारण उपमंडल समाना के अधीन पड़ते काफी गांवों की फसलों के मालियामेट होने की खबर से लोगों में इस बात से भारी रोष है कि सरकार से लगभग प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ की रोकथाम के लिये बार-बार मांग करने पर भी कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। फसलों के विनाश के पश्चात मुआवजे के नाम पर अकसर प्रशासन के उच्चाधिकारी भी मनमानियां करते है।

बाढ़ग्रस्त गांव में किसानों की आर्थिक दशा इतनी खराब हो गई है कि पुनः फसल बोना तो दूर उन्हें अपने गरीब परिवारों का पालन-पोषण करने में भी भारी कठिनाई होगी।

अस्पतालों के स्वास्थ्य कर्मियों ने हड़ताल की

केन्द्र और दिल्ली सरकार के अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के ग्रुप-तीन और ग्रुप चार के
70,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन मंे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये।

राजधानी के विभिन्न अस्पतालों के ये स्वास्थ्य कर्मी मरीज देख रेख भत्ता और धुलाई भत्ते में वृद्धि की मांग कर रहें। साथ ही वे समयबद्ध तीन पदोन्नति भी मांग रहे हैं।

हड़ताल को टालने का अंतिम प्रयास भी उस समय विफल हो गया जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री दलित एलिजमलई और आंदोलन का नेतृत्व कर रही संयुक्त परिषद के प्रतिनिधियों के बीच की बातचीत असफल रही।

अपने मांगो के समर्थन में हड़ताली स्वास्थ्यकर्मी पूर्व निश्चित कार्यक्रम के अंतर्गत संसद पर प्रदर्शन करने गये तो दिल्ली प्रशासन ने पुलिस और होमगार्डो के द्वारा आंदोलन को भरपूर रोकने की कोशिश कि जिससे पुलिस एवं होमगार्डो और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच संघर्ष हुआ। संयुक्त समिति के अनुसार प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों पर 11 राउंड आंसू गैस गोले दागे और लाठी चार्ज किया जिसके परिणामस्वरुप, 70 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिनमें तीन महिला भी थी। घायलों में पांच की हालत गंभीर थी जिनको अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दूसरी ओर प्रशासन स्वास्थ्यकर्मीयों की हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाते हुए दैनिक वेतनभोगी सेवाएं समाप्त करने की चेतावनी दी परन्तु अस्पताल कर्मियों के दृढ़ संघर्ष को झुकाने में प्रशासन नाकाम रही।

बिजली पानी को लेकर पुलिस से झड़प

उत्तरी पूर्वी दिल्ली के अनेक इलाके में बिजली तथा पानी की समस्या को लेकर सीलम पुर, खुरैजी तथा शास्त्री पार्क आदि इलाकों के लालबत्ती पर स्थानीय लोगों ने दोपहर से ही सड़क जाम कर रखा था। लोगों का कहना था कि इस इलाके में पिछले कई दिनो से घंटों घंटो बिजली तथा पानी की आपूर्ति ठप्प रहती है। प्रशासन से खार खाये लोग ने अपने अपने इलाकों के लालबत्ती पर जमा हुए और वहां प्रशासन के विरुद्ध नारे लगाना शुरू किया जिसके कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिस के आंसू गैस तथा लाठी चार्ज में कई लोग घायल हो गये। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

ग्रामीण बैंक कर्मियों ने 24 को संसद पर प्रदर्शन किया

आल इंडिया ग्रामीण बैंक वर्कर्ज एवं आफिसर्स आर्गेनाइजेशन के संयुक्त आह्वान पर देशभर में कार्यरत 196 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको के 70 हजार कर्मचारी एवं अधिकारीयों ने केंद्र सरकार की ग्रामीण बैंक विरोधी नीतियों के खिलाफ 24 जुलाई को दिल्ली संसद पर प्रदर्शन किया।

कुलियों ने संसद मार्ग पर प्रदर्शन किया

आज देश के प्रत्येक राज्य में जब मजदूर वर्ग अपने हक के लिए लड़ रहा है तो रेलवे स्टेशन के सैंकड़ो कुलीयों ने भी अपनी मजदूरी बढ़ाये जाने की मांग को लेकर आल इंडिया कुली एसोसिएशन के बैनर तले भारी उत्साह के साथ संसद मार्ग पर प्रदर्शन किया और सरकार के विरूद्ध नारेबाजी की।

ये सभी कुली अपनी वर्दी में लेस होकर जंतर-मंतर की ओर चले, किन्तु पुलिस प्रशासन के कड़े बंदोबस्त ने उन्हें संसद मार्ग पर रोक लिया। प्रदर्शन के बाद उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

कुलियों की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया, जिसमें ढुलाई दर बढ़ाने जाने की मांग की गई है।

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