सड़क परिवहन श्रमिकों का नवम्बर में संसद पर प्रदर्शन

सड़क परिवहन श्रमिकों का नवम्बर में संसद पर प्रदर्शन

राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाईज यूनियन के सूत्रों के अनुसार, सड़क परिवहन श्रमिकों राष्ट्रीय संगठन “नेशनल फैडरेशन आफ इण्डियन रोड ट्रान्सपोर्ट वर्कस” के केरल प्रदेश की राजधानी “त्रिवेन्द्रम” में 8 जुलाई 1998 से 9 जुलाई को सम्पन्न हुए दो दिवसीय 12वें राष्ट्रीय अधिवेशन में भारत के राष्ट्रीयकृत सड़क परिवहन उपक्रमों के निजीकरण के प्रयासों के विरोध, राष्ट्रीयकृत मार्गांे पर निजी वाहन स्वामियों के अवैध वाहन संचालन पर स्थाई रोक, मोटर वाहन अधिनियम 1998 सहित मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम 1961 में व्यापक संशोधन एवं यात्री सड़क परिवहन के साथ माल सड़क परिवहन के शत-प्रतिशत राष्ट्रीयकरण आदि ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर का आन्दोलन श्ुारू करने का निर्णय लिया गया है।

सड़क परिवहन उद्योग में कार्यरत श्रमिक संगठनो की “आल इण्डिया को-आर्डीनेशन कमेटी आफ रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स” में शीघ्र ही विचार विमर्श किया गया कि संसद के शीतकालीन सत्र में ”मोटर वाहन आधिनियम 1998” एवं “मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम, 1961” में व्यापक संशोधन के लिए संसद सदस्यों के माध्यम से “निजी विधेयक”, “प्राईवेट बिल” प्रस्तुत करवाया जायेगा। नवम्बर में संसद पर राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन किया जायेगा। इस बारे में भारत सरकार का रूख नकारात्मक रहने की स्थिति में संसद के आगामी “बजट सत्र” के अवसर पर मार्च में देश भर में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की जायेगी।

“नेशनल फैडरेशन आफ इण्डियन रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स” के वरिष्ठ उपाध्यक्ष द्वारा किये गये झण्डारोहण के साथ शुरू हुए अधिवेशन का उद्घाटन केरल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के केरल प्रदेश के सचिव द्वारा किया गया। अधिवेशन में राजस्थान सहित देश के 18 प्रदेशों के सड़क परिवहन श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा दक्षिण एशियाई देशों के राष्ट्रीय स्तर के बिरादराना सड़क परिवहन श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

व्यावसायिक वाहन आपरेटर हड़ताल पर 22 अगस्त से

नयी दिल्ली के ट्रको-बसों व तिपहिया समेत व्यावसयिक वाहन आपरेटरों ने 22 अगस्त की मध्य रात्रि से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।

ट्रांसपोर्टरों की अन्य मांगों में सड़क ट्रांसपोर्ट उद्योग को उद्योग का दर्जा देने, मौजूदा सड़कों से पथकर की वसूली बंद करने, लगान मूल्य चुकता होने के बाद पुलों से कर वसूली रोकने, चुंगी चैकियों को हटाने और केंद्र द्वारा राष्ट्रीय परमिट दिया जाना, स्टेज कैरिज वाहनों का किराया निश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शुल्क आयोग की स्थापना किया जाना शामिल है

हजारों रोडवेज़ कर्मी 22 जुलाई के चंडीगढ़ कूच में शामिल हुए

हरियाणा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर चण्डीगढ़ के मटका चैक पर उत्साह के साथ भारी संख्या में रोडवेज कर्मचारियों ने मौजूदा सरकार के विरुद्ध जमकर नारे बाजी करते हुए दिन भर सामूहिक धरना दिया और सरकार द्वारा उनकी लम्बित आर्थिक मांगो को तुरन्त लागू करने में जो अनावश्यक देरी की उसकी कड़ी निंदा की।

कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि 2 व 25 मई को मुख्य सचिव से बातचीत करने के दौरान उन्होनें मांगों हेतु पैकेज लागू करने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कर्मचारियों की मांगों को लटकाए हुए है।

इस सम्बंध में महासंघ की उच्च नीति निर्धारण कमेटी ने आगे के आन्दोलन की रूपरेखा तय की। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि 6 अगस्त से पूरे हरियाणा में जिला स्तर पर धरना दिया जायगा और 16 सितम्बर को कर्मचारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल करेंगें।

दूसरी ओर हरियाणा रोडवेज के संैकड़ों दैनिक वेतन भोगी तथा ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने के कारण कुरूक्षेत्र डिपों के सभी कर्मचारियों ने स्थानीय बस अड्डे के बाहर सड़क पर चक्का जाम किया और प्रशासन विरोधी नारेबाजी की। लगभग सवा दो घंटे तक किये गये जाम को कर्मचारियों ने तभी खोला जब थानेसर के उपमंडल अधिकारी ने उन्हें वेतन देने का आश्वासन दिया।

धरना उठाने तथा जाम खोलने से पूर्व कर्मचारी नेताआंे ने आरोप लगाया कि वेतन न मिलने का सबसे बड़ा कारण डिपो के महाप्रबंधक है। उन्होंने अपने आरोप में कहा कि महाप्रबंधक जानबूझ कर ऐसा कर रहे है।

किसान भूखमरी के कगार पर

हरियाणा के सिरसा जिले के किसानांे को सरकारी असहयोग के रवैये और प्राकृतिक विपदाओं जैसे ओलावृद्धि, बारिश, सूखा, इत्यादि के कारण आर्थिक दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है और आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति पिछले लगभग तीन-चार सालों से कपास की फसलों का उत्पादन निरंतर कम होने के कारण और विभिन्न प्रकार के कीटों के कारण इन फसलों को भारी नुकसान के कारण पैदा हुई है। इन कीटों से बचाव के लिए किसान बाजार से जो कीटनाशक लेकर प्रयोग कर रहे हैं उनसे उन्हें कोई लाभ नहीं हो रहा हैं क्योंकि ज्यादातर कीटनाशक नकली होने के कारण कोइे असर नहीं करते। इन हालतों में किसान, खेतिहर मजदूर व कृषि पर निर्भर अन्य वर्ग जैसे ग्रामीण दस्तकार आदि भी भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं और इसी आर्थिक तंगी के कारणों से अनेक स्थानों पर किसानों, खेतिहर मजदूरों आदि द्वारा आत्महत्याएं हो रही हैं।

सरकार की तरफ से किसानों को इन हालातों से उबारने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। दूसरी ओर रोहतक के किसानों और खेत मजदूरों को सहकारी बैंक का ऋण न चुका पाने के कारण वर्तमान प्रशासन ने गिरफ्तार किया। इस तरह के प्रशासनिक कार्यवाहियों के विरुद्ध हरियाणा के कृषक समाज में बहुत आक्रोश है। इस घटना को लेकर आल इंडिया कृषक एवं खेत मजदूर संगठन तथा अन्य जन संगठनों ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इससे वर्तमान प्रशासन का गरीब किसान विरोधी चेहरा नज़र आ रहा है। और उन्होंने मांग की, कि ऐसे कानून को रद्द करें और सरकार को इस ओर तुरन्त ध्यान देकर किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिये कार्य करना चाहिऐ। अपने सुझाव देते हुए किसानों व खेतिहर मजदूरों को दिये जाने वाले सरकारी ऋणों पर ब्याज 6 प्रतिशत किया जाये, कर्जा वसूली का तरीका किसानों की सुविधा मुताबिक हो, अगर किसी मजबूरीवश एक समय किसान कर्ज अदायगी में असमर्थ हो तो उसे जेल में बंद न किया जाये, उसे और समय दिया जाये।

निरंतर गिर रहे कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये केन्द्रीय बजट में 25 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया जाए जिससे पैदावार बढ़ाने केे लिये नए अनुसंधान किया जाए। आज जो पैदावार है उसे बढ़ाने तथा खेती के खर्च को घटाने तथा किसानों व मजदूरों की आमदनी बढ़ाने के उपाय किये जायें।

किसानों को बिजली पानी अचित मात्रा में उपलब्ध करवाया जाए, अच्छे खाद बीज की व्यवस्था की जाए मार्केटिंग प्रणाली में सुधार किया जाए ताकि किसानों को उनके उत्पादों की सही कीमत मिलें तथा नकली कीटनाशकों की बिक्री करने वालों के लिये कड़े दंड का प्रावधान किया जाए।

 

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